TDS का फुल फॉर्म है: “Tax Deducted at Source” (स्रोत पर कर कटौती)।
सरल भाषा में कहें तो, TDS एक ऐसा तरीका है जिससे सरकार को पहले ही टैक्स मिल जाता है, जब आपकी कमाई हो रही होती है।
TDS कैसे काम करता है?
जब भी आप कोई इनकम कमाते हैं (जैसे सैलरी, FD का ब्याज, रेंट, प्रोफेशनल फीस आदि), तो:
- इनकम देने वाला (जैसे कंपनी, बैंक, क्लाइंट) पहले से ही उस पर कुछ प्रतिशत टैक्स काट लेता है।
- यह कटा हुआ टैक्स सीधे सरकार को भेज दिया जाता है।
- जो पैसा बचता है, वह आपको मिलता है।
उदाहरण:
| इनकम का प्रकार | इनकम देने वाला | आपकी इनकम | TDS (%) | आपको मिलेगा |
|---|---|---|---|---|
| सैलरी | नियोक्ता (कंपनी) | ₹50,000 | 10% | ₹45,000 |
| FD ब्याज | बैंक | ₹10,000 | 10% | ₹9,000 |
(नोट: यह सिर्फ उदाहरण है, असली TDS दरें अलग हो सकती हैं)
TDS काटा गया हो तो आपको क्या करना चाहिए?
- Form 26AS या AIS चेक करें:
- यह सरकारी पोर्टल पर एक स्टेटमेंट होता है जिसमें दिखता है कि कितना TDS कटा और किसने काटा।
- ITR फाइल करें:
- अगर आपकी कुल इनकम टैक्सेबल लिमिट से कम है, तो आप रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
TDS किन-किन चीज़ों पर कटता है?
| इनकम का प्रकार | TDS कटता है? |
|---|---|
| सैलरी | ✅ हां |
| बैंक FD ब्याज | ✅ हां |
| रेंट (₹50,000+ /माह) | ✅ हां |
| प्रोफेशनल फीस | ✅ हां |
| कैश निकासी (₹1 करोड़ से ऊपर) | ✅ हां |
अगर TDS कट गया, लेकिन इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती?
तब आप ITR फाइल करके रिफंड ले सकते हैं।

