परंपरा और आस्था का प्रतीक

परंपरा और आस्था का प्रतीक

भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं है, बल्कि यह गहराई से जुड़ी हुई संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। आइए इस भावना को थोड़ा विस्तार से समझते हैं:

1. सांस्कृतिक महत्व:

भारत में जन्म, विवाह, त्योहार और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर सोना देना और लेना एक परंपरा रही है। यह समृद्धि, शुभता और अच्छे भविष्य का प्रतीक माना जाता है।

2. धार्मिक आस्था:

धार्मिक दृष्टिकोण से सोना देवी लक्ष्मी (धन की देवी) का प्रतीक है। धनतेरस, दीवाली, अक्षय तृतीया जैसे पर्वों पर सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।

3. विवाह में महत्व:

भारतीय विवाह में सोने के गहनों का विशेष महत्व होता है। यह न केवल दुल्हन की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

4. संपत्ति और निवेश:

सोना भारतीय परिवारों के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। आर्थिक संकट के समय लोग अक्सर इसे बेचकर या गिरवी रखकर राहत पाते हैं।

5. लोक कथाएँ और पौराणिक महत्व:

रामायण, महाभारत और अन्य ग्रंथों में सोने का उल्लेख राजा-महाराजाओं की ऐश्वर्य और शक्ति के प्रतीक के रूप में मिलता है — जैसे सोने की लंका, स्वर्ण सिंहासन, आदि।

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